ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 06 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 06 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छठा अध्याय विष्णुपत्नी लक्ष्मी, सरस्वती एवं गङ्गा का परस्पर शापवश भारतवर्ष में पधारना भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! वे भगवती सरस्वती स्वयं वैकुण्ठ में भगवान् श्रीहरि के पास रहती हैं। पारस्परिक कलह के कारण गङ्गा ने इन्हें शाप… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 05 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 05 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पाँचवाँ अध्याय याज्ञवल्क्य द्वारा भगवती सरस्वती की स्तुति [ ऋषिप्रवर ] भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! सरस्वती देवीका स्तोत्र सुनो, जिससे सम्पूर्ण मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं । प्राचीन समय की बात है — याज्ञवल्क्य नाम से प्रसिद्ध… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 04 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 04 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौथा अध्याय सरस्वती की पूजा का विधान तथा कवच नारदजी ने कहा — भगवन्! आपके कृपा-प्रसाद से यह अमृतमयी सम्पूर्ण कथा मुझे सुनने को मिली है। अब आप इन प्रकृति-संज्ञक देवियों के पूजन का प्रसंग विस्तार के साथ बताने… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 03 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 03 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तीसरा अध्याय परिपूर्णतम श्रीकृष्ण और चिन्मयी श्रीराधा से प्रकट विराट्स्वरूप बालक का वर्णन भगवान् नारायण कहते हैं — नारद ! तदनन्तर वह बालक जो केवल अण्डाकार था, ब्रह्माकी आयुपर्यन्त ब्रह्माण्ड-गोलक के जल में रहा। फिर समय पूरा हो जाने… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 02 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 02 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दूसरा अध्याय परब्रह्म श्रीकृष्ण और श्रीराधा से प्रकट चिन्मय देवी और देवताओं के चरित्र नारदजी ने कहा — प्रभो ! देवियों के सम्पूर्ण चरित्र को मैंने संक्षेप से सुन लिया। अब सम्यक् प्रकार से बोध होने के लिये आप… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 01 ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 01 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पहला अध्याय पञ्चदेवीरूपा प्रकृति का तथा उनके अंश, कला एवं कलांश का विशद वर्णन भगवान् नारायण कहते हैं — नारद ! गणेशजननी दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, सावित्री और राधा – ये पाँच देवियाँ प्रकृति कहलाती हैं । इन्हीं पर सृष्टि… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 30 ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 30 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः तीसवाँ अध्याय नारायण के द्वारा परमपुरुष परमात्मा श्रीकृष्ण तथा प्रकृतिदेवी की महिमा का प्रतिपादन श्रीनारायण बोले — गणेश, विष्णु, शिव, रुद्र, शेष, ब्रह्मा आदि देवता, मनु, मुनीन्द्रगण, सरस्वती, पार्वती, गङ्गा और लक्ष्मी आदि देवियाँ भी जिनका सेवन करती हैं, उन भगवान् गोविन्द के… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 29 ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 29 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः उनतीसवाँ अध्याय बदरिकाश्रम में नारायण के प्रति नारदजी का प्रश्न सौति कहते हैं — शौनक ! देवर्षि नारद ने नारायण ऋषि के आश्चर्यमय आश्रम को देखा, जो बेर के वनों से सुशोभित था । नाना प्रकार के वृक्षों और फलों से भरे हुए… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 28 ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 28 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः अट्ठाइसवाँ अध्याय परब्रह्म परमात्मा के स्वरूप का निरूपण नारदजी ने पूछा — जगन्नाथ ! जगद्गुरो ! आपकी कृपा से मैंने सब कुछ सुन लिया। अब आप ब्रह्म के स्वरूप का वर्णन – ब्रह्मतत्त्व का निरूपण कीजिये । प्रभो ! सर्वेश्वर ! ब्रह्म साकार… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 27 ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 27 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः सत्ताईसवाँ अध्याय ब्राह्मणों के लिये भक्ष्याभक्ष्य तथा कर्तव्याकर्तव्य का निरूपण नारदजी ने पूछा — प्रभो ! गृहस्थ ब्राह्मणों, यतियों, वैष्णवों, विधवा स्त्रियों और ब्रह्मचारियों के लिये क्या भक्ष्य है और क्या अभक्ष्य ? क्या कर्तव्य है और क्या अकर्तव्य ? अथवा उनके लिये… Read More