श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठवाँ अध्याय भगवती जगदम्बिका द्वारा अपने स्वरूप का वर्णन तथा ‘महासरस्वती’, ‘महालक्ष्मी’ और ‘महाकाली’ नामक अपनी शक्तियों को क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और शिव को प्रदान करना ब्रह्मणे श्रीदेव्या उपदेशवर्णनम् ब्रह्माजी बोले — अत्यन्त नम्र भाव से मेरे पूछने पर… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय ब्रह्मा और शिवजी का भगवती की स्तुति करना हरब्रह्मकृतस्तुतिवर्णनम् ब्रह्माजी बोले — [ हे नारद!] इस प्रकार देवदेव जनार्दन भगवान् विष्णु के स्तुति कर लेने के उपरान्त भगवान् शिवशंकर विनीत भाव से देवीके सम्मुख स्थित होकर कहने… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय भगवती के चरणनख में त्रिदेवों को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का दर्शन होना, भगवान् विष्णु द्वारा देवी की स्तुति करना विष्णुना कृतं देवीस्तोत्रम् ब्रह्माजी बोले — हे नारद! ऐसा कहकर जनार्दन भगवान् विष्णु ने पुनः कहा — हम लोग… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय ब्रह्मा, विष्णु और महेश का विभिन्न लोकों में जाना तथा अपने ही सदृश अन्य ब्रह्मा, विष्णु और महेश को देखकर आश्चर्यचकित होना, देवीलोक का दर्शन विमानस्थैर्हरादिभिर्देवीदर्शनम् ब्रह्माजी बोले — मन के समान वेग से उड़नेवाला वह विमान… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दूसरा अध्याय भगवती आद्याशक्ति के प्रभाव का वर्णन ब्रह्मादीनाङ्गतिवर्णनम् व्यासजी बोले — हे महाबाहो ! हे कुरुश्रेष्ठ ! आपने मुझसे जो प्रश्न पूछे हैं, उन्हीं प्रश्नों को मेरे द्वारा मुनिराज नारदजी से पूछे जाने पर उन्होंने इस विषय में… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-तृतीयः स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-तृतीयः स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय राजा जनमेजय का ब्रह्माण्डोत्पत्ति विषयक प्रश्न तथा इसके उत्तर में व्यासजी का पूर्वकाल में नारदजी के साथ हुआ संवाद सुनाना भुवनेश्वरीवर्णनम् जनमेजय बोले — हे भगवन्! आपने महान् अम्बा-यज्ञ के विषय में कहा है । वे अम्बा… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय आस्तीक मुनि के जन्म की कथा, कद्रू और विनता द्वारा सूर्य के घोड़े के रंग के विषय में शर्त लगाना और विनता को दासी भाव की प्राप्ति, कद्रू द्वारा अपने पुत्रों को शाप श्रोतृप्रवक्तृप्रसङ्गः सूतजी बोले —… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय जनमेजय का राजा बनना और उत्तंक की प्रेरणा से सर्प-सत्र करना, आस्तीक के कहने से राजा द्वारा सर्प-सत्र रोकना सर्पसत्रवर्णनम् सूतजी बोले — सभी मन्त्रियों ने राजा परीक्षित् को मृतक तथा उनके पुत्र जनमेजय को अबोध जानकर… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय महाराज परीक्षित् को डँसने के लिये तक्षक का प्रस्थान, मार्ग में मन्त्रवेत्ता कश्यप से भेंट, तक्षक का एक वटवृक्ष को डँसकर भस्म कर देना और कश्यप का उसे पुनः हरा-भरा कर देना, तक्षक द्वारा धन देकर कश्यप… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-द्वितीयः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-द्वितीयः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय सर्प के काटने से प्रमद्वरा की मृत्यु, रुरु द्वारा अपनी आधी आयु देकर उसे जीवित कराना, मणि-मन्त्र-औषधि द्वारा सुरक्षित राजा परीक्षित् का सात तलवाले भवन में निवास करना परीक्षिद्‌राज्ञो गुप्तगृहे वासवर्णनम् परीक्षित्‌ बोले — [हे सचिववृन्द!] इस… Read More