श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-31 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-31 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-एकत्रिंशोऽध्यायः इकतीसवाँ अध्याय शुम्भ का रणभूमि में आना और देवी से वार्तालाप करना, भगवती कालिका द्वारा उसका वध, देवी के इस उत्तम चरित्र के पठन और श्रवण का फल शुम्भवध व्यासजी बोले — उन सैनिकों का यह वचन सुनकर क्रोध… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-30 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-30 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-त्रिंशोऽध्यायः तीसवाँ अध्याय देवी द्वारा निशुम्भ का वध युद्धात्प्रत्यागतानां रक्षसां शुम्भाय वार्तावर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन् ! ] वह पराक्रमी निशुम्भ अब मृत्यु अथवा विजय का निश्चय करके पूरी तैयारी के साथ सेनासहित समरभूमि में उपस्थित हो गया… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-29 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-29 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-एकोनत्रिंशोऽध्यायः उनतीसवाँ अध्याय रक्तबीज का वध और निशुम्भ का युद्धक्षेत्र के लिये प्रस्थान देव्यासह युद्धकरणाय निशुम्भप्रयाणम् व्यासजी बोले — हे राजन्! किसी समय शंकरजी ने उस दानव रक्तबीज को यह बड़ा ही अद्भुत वर दे डाला था, मैं उसे बता… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-28 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-28 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-अष्टाविंशोऽध्यायः अट्ठाईसवाँ अध्याय शुम्भ का रक्तबीज को भगवती अम्बिका के पास भेजना और उसका देवी से वार्तालाप देवी के साथ रक्तबीज का युद्ध, विभिन्न शक्तियों के साथ भगवान् शिव का रणस्थल में आना तथा भगवती का उन्हें दूत बनाकर शुम्भ… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-27 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-27 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-सप्तविंशोऽध्यायः सत्ताईसवाँ अध्याय शुम्भ का रक्तबीज को भगवती अम्बिका के पास भेजना और उसका देवी से वार्तालाप रक्तबीज द्वारा देवी समीपे शुम्भनिशुम्भ संवाद वर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन्!] उन दोनों दैत्यों को मारा गया देखकर मरने से बचे… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-26 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-26 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-षड्विंशो5ध्यायः छब्बीसवाँ अध्याय भगवती अम्बिका से चण्ड-मुण्ड का संवाद और युद्ध, देवी कालिका द्वारा चण्ड-मुण्ड का वध चण्डमुण्डवधेन देव्याश्चामुण्डेतिनामवर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे महाराज !] तदनन्तर शुम्भ से ऐसा आदेश पाकर महाबली चण्ड-मुण्ड विशाल सेना के साथ बड़े वेग… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-25 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-25 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-पञ्चविंशोऽध्यायः पचीसवाँ अध्याय भगवती काली और धूम्रलोचन का संवाद, काली के हुंकार से धूम्रलोचन का भस्म होना तथा शुम्भ का चण्ड-मुण्ड को युद्ध हेतु प्रस्थान का आदेश देना देव्यासह युद्धाय चण्डमुण्डप्रेषणम् व्यासजी बोले — [ हे महाराज !] यह बात… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-24 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-चतुर्विंशोध्यायः चौबीसवाँ अध्याय शुम्भ का धूम्रलोचन को देवी के पास भेजना और धूम्रलोचन का देवी को समझाने का प्रयास करना देवीमाहात्म्ये देवीपार्श्वे धूम्रलोचनदूतप्रेषणम् व्यासजी बोले — भगवती का वह वचन सुनकर वह दूत विस्मित हो गया और उसने देवी से… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-23 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय भगवती के श्रीविग्रह से कौशिकी का प्राकट्य, देवी की कालिकारूप में परिणति, चण्ड-मुण्ड से देवी के अद्भुत सौन्दर्य को सुनकर शुम्भ का सुग्रीव को दूत बनाकर भेजना, जगदम्बा का विवाह के विषय में अपनी शर्त बताना देव्या… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-22 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-पंचम स्कन्धः-अध्याय-22 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पूर्वार्द्ध-पंचम स्कन्धः-द्वाविंशोऽध्यायः बाईसवाँ अध्याय देवताओं द्वारा भगवती की स्तुति और उनका प्राकट्य देवकृतदेव्याराधनवर्णनम् व्यासजी बोले — हे नृपश्रेष्ठ ! सभी देवता पराजित हो गये। इसके बाद शुम्भ राज्य पर शासन करने लगा । इस प्रकार एक हजार वर्ष व्यतीत हो गये… Read More