स्वरशास्त्रानुसार निवास स्थान का चयन स्वरशास्त्रानुसार निवास स्थान का चयन स्वरशास्त्रानुसार किसी व्यक्ति के निवास के लिये उपयुक्त नगर और उसकी दिशा का चयन करते हैं। सबसे पहले हम निवास के लिये उपयुक्त नगर के चयन को लेते हैं। नगर का चयन दो प्रकार से किया जाता है। १॰ नगर और व्यक्ति की नामराशियों से। २॰ नगर और व्यक्ति की… Read More
सर्व-यंत्र-मन्त्र-तंत्रोत्कीलन-स्तोत्र सर्व-यंत्र-मन्त्र-तंत्रोत्कीलन-स्तोत्र ।। पार्वत्युवाच ।। देवेश परमानन्द, भक्तानाम भयं प्रद ! आगमाः निगमाश्चैव, बीजं बीजोदयस्तथा ।।१।। समुदायेन बीजानां, मन्त्रो मंत्रस्य संहिता । ऋषिच्छन्दादिकं भेदो, वैदिकं यामलादिकम् ।।२।। धर्मोऽधर्मस्तथा ज्ञानं, विज्ञानं च विकल्पन । निर्विकल्प-विभागेन, तथा षट्-कर्म-सिद्धये ।।३।। भुक्ति-मुक्ति-प्रकारश्च, सर्वं प्राप्तं प्रसादतः । कीलनं सर्व-मन्त्राणां, शंसयद् हृदये वचः ।।४।। इति श्रुत्वा शिवा-नाथः, पार्वत्या वचनं शुभम् । उवाच… Read More
यात्रा से जुड़े शकुन यात्रा से जुड़े शकुन ‘यथा सुराणां प्रवरो मुरारिर्गंगा नदीनां द्विपदां च विप्रः । तथा प्रधानः शकुनः प्रदिष्टो वाक्यम्भवो गर्ग पराशराद्यैः ।।’ जिस प्रकार सभी देवताओं में विष्णु श्रेष्ठ है, नदियों में गंगा श्रेष्ठ है, सभी द्विपदों में ब्राह्मण श्रेष्ठ है, उसी प्रकार ‘शकुन’ भी सब सूचक पदार्थों में प्रधान है । यह गर्ग, पाराशर आदि… Read More
शंकराचार्य परम्परा अध्यात्म परम्परा १ ॐ गुरु जी प्रथमे उत्पत्ति आद्य शून्य, २ आद्य शून्य से अनादि शून्य, ३ अनादि शून्य से योगाशून्य, ४ योगाशून्य से महा-शून्य, ५ महा-शून्य से निरा शून्य, ६ निरा शून्य से आत्म-शून्य, ७ आत्म-शून्य से प्रमाल-शून्य, ८ प्रमाल-शून्य से चेतन-शून्य, ९ चेतन-शून्य से अजोड़ी शून्य, १० अजोड़ी शून्य से ओङ्कार, ११ ओङ्कार… Read More
शनि वज्र पञ्जर कवच शनि वज्र पञ्जर कवच विनियोगः- ॐ अस्य श्रीशनैश्चर-कवच-स्तोत्र-मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप् छन्द, शनैश्चरो देवता, शीं शक्तिः, शूं कीलकम्, शनैश्चर-प्रीत्यर्थं जपे विनियोगः।। नीलाम्बरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान्। चतुर्भुजः सूर्यसुतः प्रसन्नः सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्तः।।१ ब्रह्मोवाच-… Read More
रक्षा-विधानः शाबर मन्त्र रक्षा-विधानः शाबर मन्त्र विविध-रक्षा-कारक-मन्त्र “श्रीरामचन्द्र-दूत हनुमान ! तेरी चोकी – लोहे का खीला, भूत का मारूँ पूत । डाकिन का करु दाण्डीया । हम हनुमान साध्या । मुडदां बाँधु । मसाण बाँधु । बाँधु नगर की नाई । भूत बाँधु । पलित बाँधु । उघ मतवा ताव से तप । घाट पन्थ की रक्षा –… Read More
नारायणास्त्रम् ।। नारायणास्त्रम् ।। हरिः ॐ नमो भगवते श्रीनारायणाय नमो नारायणाय विश्वमूर्तये नमः श्री पुरुषोत्तमाय पुष्पदृष्टिं प्रत्यक्षं वा परोक्षं अजीर्णं पञ्चविषूचिकां हन हन ऐकाहिकं द्वयाहिकं त्र्याहिकं चातुर्थिकं ज्वरं नाशय नाशय चतुरशितिवातानष्टादशकुष्ठान् अष्टादशक्षय रोगान् हन हन सर्वदोषान् भंजय भंजय तत्सर्वं नाशय नाशय आकर्षय आकर्षय शत्रून् शत्रून् मारय मारय उच्चाटयोच्चाटय विद्वेषय विदे्वेषय स्तंभय स्तंभय निवारय निवारय विघ्नैर्हन विघ्नैर्हन… Read More
श्री नारायण कवच श्री नारायण कवच न्यासः- सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा भगवान नारायण को नमस्कार करके नीचे लिखे प्रकार से न्यास करें। अगं-न्यासः- ॐ ॐ नमः — पादयोः ( दाहिने हाँथ की तर्जनी व अंगुठा — इन दोनों को मिलाकर दोनों पैरों का स्पर्श करें)। ॐ नं नमः — जानुनोः ( दाहिने हाँथ की तर्जनी व अंगुठा —… Read More
नारायण हृदयम् ।। नारायण हृदयम् ।। भगवान् लक्ष्मी-नारायण की प्रसन्नता के लिए “लक्ष्मी-हृदय” के साथ इसका पाठ करने से धन-धान्य व ऐश्वर्य की वृद्धि होती है । आचम्य प्राणानायम्य देशकालौ स्मृत्वा। अस्मद्गुर्वन्तर्गत – श्रीभारतीरमणमुख्यप्राणान्तर्गत – श्रीलक्ष्मीनारायणप्रेरणया श्रीलक्ष्मीनारायणप्रीत्यर्थं ममाभीष्टसिद्ध्यर्थं सङ्कलीकरणरीत्या सम्पुटीकरणरीत्या वा नारायणहृदयस्य सकृदावर्तनं करिष्ये ।… Read More
परशुराम-कृत श्रीदुर्गा-स्तोत्र परशुराम-कृत श्रीदुर्गा-स्तोत्र ।। परशुराम उवाच ।। श्रीकृष्णस्य च गो-लोके-परिपूर्णतमस्य चः । आविर्भूता विग्रहतः, परा सृष्ट्युन्मुखस्य च ।। सूर्य-कोटि-प्रभा-युक्ता, वस्त्रालंकार-भूषिता । वह्नि-शुद्धांशुकाधाना सुस्मिता, सुमनोहरा ।। नव-यौवन-सम्पन्ना सिन्दूर-विन्दु-शोभिता । ललितं कबरीभारं मालती-माल्य-मण्डितम् ।। अहोऽनिर्वचनीया त्वं, चारुमूर्ति च बिभ्रती । मोक्षप्रदा मुमुक्षूणां, महाविष्णोर्विधिः स्वयम् ।। मुमोह क्षणमात्रेण दृष्ट्वा, त्वां सर्वमोहिनीम् । बालैः सम्भूय सहसा, सस्मिता धाविता पुरा ।।… Read More