गण्डा देने का मन्त्र गण्डा देने का मन्त्र मन्त्रः- “ओम नमो आदेश गुरु को । जागे गणेश देवता, मुह-मदा वीर जागे । काले घोड़े को बाँधों । काली घोड़ी को बाँधों । अग्नि को बाँधों । बिजली को बाँधों । लगे-लगाए को बाँधों । भेजे-भेजाए को बाँधो । हाकिन-डाकिन को बाँधों । सुलेमान-पीर पैगम्बर की होय दुहाई । फुरो… Read More
पीड़ा-निवारक मन्त्र पीड़ा-निवारक मन्त्र मन्त्रः- “कहाँ से आया गुरु, कहाँ से आया चेला? कहाँ से आया मुहम्मद-पीर ? स्वर्ग से आया गुरु, पाताल से आया चेला, मक्का-मदीना से आया मुहम्मद-पीर । साथ आए शङ्कर भोले, क्षण में जाए पीड़ । चले मन्त्र, ईश्वर महा- देव का वाचा फुरे ।”… Read More
रक्षा-पाल का मन्त्र 02 रक्षा-पाल का मन्त्र मन्त्रः- “जागो रघुवीर । जागो पौणाहारी । जाग पवना-हारी । जाग गुर पहाड़िया गुर – नाम सहाई, जिसकी महिमा किसी नहीं पाई । जागो पवन । जाग जोतांवालों, तेरे दर ते खड़े ने सवाली । धरती जागे, अम्बर जागे – जागे तिन्न लोक, तैंतीस करोड़ देवता जागे । जागे ब्रह्मा, जागे विष्णु,… Read More
रक्षा-पाल का मन्त्र 01 रक्षा-पाल का मन्त्र मन्त्रः- “जाग-जाग वापुए देया पुत्रा । काली-माई देया चेलया । महा – रुद्रिया देया जाया । लीलो बहना दया भाईया । ज्यूणिया-घुम्हारिया देया सज्जणा । हीराँ गदड़े – टियाँ देया खसमा । घगरिया – नानिया देया दोतुआ । जाति – दा लुलाला भेडाँ – दा भाला जुआलिया सुहाला । धारा नगारा दूँगी… Read More
भैरों सिद्धि का मन्त्र 02 भैरों सिद्धि का मन्त्र मन्त्रः- “काला भैरों कपली जटा । हत्थ वराड़ा, कुन्द बड़ा । काला भैरों हाजिर खड़ा । चाम की गुत्थी, लौंग की विभूत । लगे लगाए की करे भस्मा भूत । काली बिल्ली, लोहे की पाखर, गुराँ सिखाए अढ़ाई अखर । अढ़ाई अखर गए गुराँ के पास, गुराँ बुलाई काली । काली… Read More
भैरों सिद्धि का मन्त्र 01 भैरों सिद्धि का मन्त्र मन्त्रः- “भैरों ऐंडी, भैरों मैंडी, भैरों सबका दूत । देवी का दूत, देवता का दूत । गुरु का दूत, पीर का दूत । नाथों का दूत, पीरों का दूत । भैरों छड़िया कहाए जहाँ, सिमरूँ तहाँ आए । जहाँ भेजूँ, तहाँ जाए । चले मन्त्र, फुरे वाचा । देखूँ छड़िया भैरों,… Read More
अभिचार-नाशक मन्त्र 03 अभिचार-नाशक मन्त्र मन्त्रः- “काली-काली, महा-काली । ब्रह्मा की बेटी, इन्द्र की साली । दोनों हाथ बजावे ताली । हङ्किनी – डङ्किनी को भस्म करे । अल्लाह-बिसमिल्लाह को भस्म करे । नौ नाथ, चौरासी सिद्धों को भस्म करे । नौ नारसिंह, सोलह सींडुओं को भस्म करे । बावन वीर, चौंसठ योगिनी को भस्म करे । अस्सी… Read More
अभिचार-नाशक मन्त्र 02 अभिचार-नाशक मन्त्र मन्त्रः- “हनुमान वीर बैठे मसान, जो मन भावे सो प्रमाण । पञ्जे अङ्गी, पञ्जे मुट्ठी । छेवाँ गुग्गल, होया प्रकाश । मोहनी-दोहनी दोनों बहनाँ, हत्थ में तक्की तेल- कड़ावाँ । तेल हमारे मुख में चढ़े । सार का तड़ाग, रूपे का लँगोट । हनुमान वीर सुत्ते ताँ जाग हमारे पास । भूत-प्रेत को… Read More
अभिचार-नाशक मन्त्र 01 अभिचार-नाशक मन्त्र मन्त्रः- “अग्नि का घोड़ा, बिजली की लगाम, जहाँ चढ़े हनुमान वीर, पठान लाल खान-जवान । क्या करता आया? भन्न के भसूड़ी, कढ़ के कलेजा, उस दुश्मन का खाया । जिसने ‘फलाने’ पर बार चलाया । सवा घड़ी में उसका स्यापा पाया । देखां हनुमान वीर, पठान लाल खान- जवान, तेरे इल्म चोट का… Read More
भगवान् वराह भगवान् वराह स्रुक्-तुण्ड सामस्वरधीरनाद, प्राग्वंशकायाखिलसत्रसन्धे । पूर्तेष्टधर्मश्रवणोऽसि देव सनातनात्मन् भगवन् प्रसीद ।। (विष्णुपुराण १ । ४ । ३४) ‘प्रभो ! स्रुक् आपका तुण्ड (थूथनी) है, सामस्वर धीर-गम्भीर शब्द है, प्राग्वंश (यजमानगृह) शरीर है तथा सम्पूर्ण सत्र (सोमयाग) शरीर की संधियाँ हैं । देव ! इष्ट (यज्ञ-यागादि) और पूर्त (कुआँ, बावली, तालाब आदि खुदवाना, बगीचा लगाना… Read More