सर्वजन मोहन पुनर्नवा वशीकरण मन्त्र सर्वजन मोहन पुनर्नवा वशीकरण मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो सर्व जीव वंशराय कुरु-कुरु स्वाहा।”… Read More
सिन्दूर मोहन शाबर मन्त्र सिन्दूर मोहन शाबर मन्त्र विधि – सर्वप्रथम एक चाँदी की डिब्बी में “कामिया सिन्दूर” लेकर छत पर या किसी खुले स्थान में पूर्णमासी की सारी रात्रि में छोड़ दें। यह इस प्रकार से डिब्बी को खुली रखें कि इस पर सारी रात चाँदनी पड़ती रहें । सूर्योदय से पूर्व ही इसे उठा लायें और सिरहाने… Read More
वीर सिद्धि शाबर मन्त्र वीर सिद्धि शाबर मन्त्र विधिः- किसी भी शनिवार की रात्रि से सरसों के तेल का दीपक जलाकर इस मंत्र को दक्षिण की ओर मुख करके जपा जाता है। लोबान जलाकर रखें और इस मंत्र का प्रति रात 1008 बार जाप करें। यह प्रयोग 41 रात्रि तक करें तो सिद्धि मिलती है। मंत्र सिद्ध हो जाने… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) वेदाध्ययन-विधि, ओंकार तथा गायत्री-महात्म्य, आचार्यादि-लक्षण, ब्रह्मचारि-धर्म-निरूपण, अभिवादन-विधि, स्नातक की महिमा में अङ्गिरापुत्र का आख्यान, माता-पिता और गुरु की महिमा सुमन्तु मुनिने कहा – राजन् ! ब्राह्मण का केशान्त (समावर्तन) – संस्कार सोलहवें वर्ष में, क्षत्रिय का बाइसवें वर्ष में तथा वैश्य का पचीसवें वर्ष… Read More
मंत्रात्मक गायत्री कवच ॥ मंत्रात्मक गायत्री कवच ॥ देव देव महादेव! संसारार्णव तारक ! गायत्री कवचं देव ! कृपया कथय प्रभो । ॥ महादेव उवाच ॥ मूलाधारेषु या नित्या कुण्डली तत्त्व-रूपिणी । सूक्ष्माति सूक्ष्मा परमा विसतन्तु-स्वरूपिणी ॥ विद्युत-पुञ्ज-प्रतीकाशा कुण्डलाकृति-रूपिणी । परम-ब्रह्म गृहिणी पञ्चाशद् वर्ण-रूपिणी ॥ शिवस्य नर्तकी नित्या परम् ब्रह्म-पूजिता । ब्रह्मणः सैव गायत्री सच्चिदानन्दरूपिणी ॥ तद् भ्रमावर्त्तवातोऽयं… Read More
श्री गायत्री कवचम् ॥ श्री गायत्री कवचम् ॥ ॥याज्ञवल्क्य उवाचः॥ स्वामिन् सर्व-जगन्नाथ संशयोऽस्ति महान्मम् । चतुः षष्टि-कलानां च पातकानां तद्वद् ॥१ ॥ मुच्यते केन पुण्येन ब्रहा-रूपं कथं भवेत् । देहश्च देवता-रूपं मन्त्र-रूपं विशेषतः ॥२ ॥ क्रमतः श्रोतुमिच्छामि कवचं विधि-पूर्वकम् । ॥ब्रह्मोवाचः॥ विनियोगः- “ॐ अस्य श्री गायत्री-कवचस्य ब्रह्म-विष्णु-रुद्रा ऋषयः ऋग्यजुः सामाथर्वाणिच्छन्दांसि पर-ब्रह्म-स्वरूपिणी गायत्री देवता भूः बीजम् भुवः शक्तिः स्वः… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नम: ॥ श्रीगणेशाय नम ॥ ॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ भविष्यपुराण ब्राह्म पर्व गर्भाधान से यज्ञोपवीत पर्यन्त संस्कारों की संक्षिप्त विधि, अन्न-प्रशंसा तथा भोजन-विधि के प्रसंग में धनवर्धन की कथा, हाथों के तीर्थ एवं आचमन-विधि राजा शतानीक ने कहा — हे मुने ! आपने मुझे जातकर्मादि संस्कारों के विषय में बताया, अब आप इन… Read More
व्यापार वृद्धि शाबर मंत्र व्यापार वृद्धि शाबर मंत्र विधिः- व्यापार का दैनिक कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व यदि इस मंत्र का 108 बार उच्चारण करके दुकान खोलें और व्यापार का दैनिक कार्य प्रारम्भ करें तो उस दिन ब्रिकी बढ़ती है और किसी प्रकार का कोई उपद्रव या परेशानी नहीं आती। इस मंत्र को सिद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १-२ ॐ श्रीपरमात्मने नम: ॥ श्रीगणेशाय नम ॥ ॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ भविष्यपुराण ब्राह्म पर्व व्यास-शिष्य महर्षि सुमन्तु एवं राजा शतानीक का संवाद, भविष्यपुराण की महिमा एवं परम्परा सृष्टि-वर्णन, चारों वेद-पुराण एवं चारों वर्णों की उत्पत्ति, चतुर्विध सृष्टि, काल-गणना, युगों की संख्या, उनके धर्म तथा संस्कार “नारायंण नमस्कृत्य नर व नरोत्तम। देवी सरस्वतीं व्यास ततो जयपुदीरयेत्॥”… Read More
शाबर तंत्र साधना से पूर्व आवश्यक निर्देश शाबर तंत्र साधना से पूर्व आवश्यक निर्देश किसी भी साधक को कोई भी तांत्रिक प्रयोग अथवा तंत्र-मंत्र-यंत्र साधना करने से पूर्व अपने इष्टदेव का स्मरण तथा अपने पूज्य गुरूदेव का आशीर्वाद व मार्गदर्शन तथा निम्नांकित आवश्यक निर्देशों एवं सावधानियों का पालन करना अत्यावश्यक होता है- * मंत्रतंत्र का जप अंग-शुद्धि, सरलीकरण एवं विधि-विधान पूर्वक करना… Read More