ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २८ स्त्रियों के शुभाशुभ- लक्षण ब्रह्माजी बोले – कार्तिकेय ! स्त्रियों के जो लक्षण मैंने पहले नारदजी को बतलाये थे, उन्हीं शुभाशुभ-लक्षणों को बताता हूँ । आप सावधान होकर सुनें – शुभ मुहूर्त में कन्या के हाथ, पैर, अँगुली, नख, हाथ की… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नम: श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय- २७ राजपुरुषों के लक्षण कार्तिकेयजी ने कहा – ब्रह्मन् ! आप राजाओं के शरीर के अङ्गों के लक्षणों को बताने की कृपा करें । ब्रह्माजी बोले – मैं मनुष्यों में राजाओं के अङ्गों के लक्षणों को संक्षेप में बताता हूँ । यदि ये… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नम : श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय- २४ से २६ पुरुषों के शुभाशुभ लक्षण राजा शतानीक ने पूछा – विप्रेन्द ! स्त्री और पुरुष के जो लक्षण कार्तिकेय ने बनाये थे और जिस ग्रन्थ को क्रोध में आकर भगवान शिव ने समुद्र में फेंक दिया था, वह कार्तिकेय को… Read More


फूल वशीकरण मन्त्र प्रयोगः- किसी भी शनिवार से प्रारंभ करके 31 दिनों तक नित्य 1144 बार इस मन्त्र को जप करके सिद्ध कर लें। मन्त्र जाप के समय दीपक जलावें, लोबान की धूनी दें और पास में शराब रखें। अब किसी फूल को उक्त मंत्र से 50 बार अभिमन्त्रित करके जिसे भी देंगे तो वह… Read More


पुष्प वशीकरण मन्त्र विधिः- किसी सिद्धि योग ग्रहण काल गुरु-पुष्य-योग अथवा अन्य किसी शुभ योग में विधिपूर्वक तथा शुद्धतापूर्वक एकान्त में निम्न दोनों में से किसी एक  मन्त्र को 10,000 जप-संख्या पूरी करें। फिर 108 बार आहुति देकर इसे प्रभावी बनायें। इस प्रकार यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। फिर जिस व्यक्ति को वशीभूत करना… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण ( ब्राह्मपर्व ) अध्याय – २३ चतुर्थी-कल्प-वर्णन में गणेशजी का विघ्न-अधिकार तथा उनकी पूजा-विधि राजा शतानीक ने सुमन्तु मुनि से पूछा – विप्रवर ! गणेशजी को गणों का राजा किसने बनाया और बड़े भाई कार्तिकेय के रहते हुए ये कैसे विघ्नों के अधिकारी हो गये… Read More


ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – २२ चतुर्थी-व्रत एवं गणेशजी की कथा तथा सामुद्रिक शास्त्र का परिचय सुमन्तु मुनि ने कहा – राजन् ! तृतीया-कल्प का वर्णन करने के अनन्तर अब मैं चतुर्थी-कल्प का वर्णन करता हूँ । चतुर्थी-तिथि में सदा निराहार रहकर व्रत करना चाहिये । ब्राह्मण… Read More


पान वशीकरण मन्त्र मन्त्रः- “काम देश कामाख्या देवी जहां बसे इस्माइल जोगी इस्माइल जोगी ने दिया पान बीड़ पहला बीड़ा आती जाती दूजा बीड़ा दिखावे छाती तीजा बीड़ा अंग लिपटाई ‘अमुक’ खाय पास चली आई दुहाई गुरु गोरखनाथ की।”… Read More


पान वशीकरण मन्त्र मन्त्रः-  “हरे पान हरियाले पान ॥ चिकनी सुपारी श्वैत खैर ॥ दाहिने कर चूना ॥ मोहि लेय पान ॥ हाथ में दे ॥ हाथ रस ले ॥ ये पेट मे या ॥ पेट रस ले ॥ श्री नरसिंह वीर॥ थारी शक्ति ॥ मेरी भक्ति॥ फुरो मंत्र ॥ ईश्वर महादेव की वाचा ॥”… Read More