वरुणसूक्त ऋषि — शुनःशेप, आजीगर्ति एवं वशिष्ठ, निवास स्थान —- द्युस्थानीय, ऋग्वेद संहिता, प्रथम मंडल सूक्त 25 ऋग्वेदके प्रथम मण्डल का पचीसवाँ सूक्त वरुणसूक्त कहलाता है । इस सूक्त में शुनःशे पके द्वारा वरुणदेवता की स्तुति की गयी है । शुनःशेप की कथा वेदों, ब्राह्मणग्रन्थों तथा पुराणों में विस्तार से आयी है । कथासार यह… Read More


सूर्य सूक्त (क) इस ऋग्वेदीय ‘सूर्य सूक्त ‘ ( १ / ११५ )— के ऋषि ‘कुत्स आङ्गिरस’ हैं, देवता सूर्य हैं और छन्द त्रिष्टुप् है । इस सूक्त के देवता सूर्य सम्पूर्ण विश्व के प्रकाशक ज्योतिर्मय नेत्र हैं, जगत् की आत्मा हैं और प्राणि-मात्र को सत्कर्मों में प्रेरित करनेवाले देव हैं, देवमण्डल में इनका अन्यतम… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६९ से १७० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६९ से १७० भगवान् सूर्य के निमित्त गृह एवं रथ आदि के दान का माहात्म्य सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अपने वित्त के अनुसार मिट्टी, लकड़ी, पत्थर तथा पके हुए ईंटों से… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६८ कामप्रद स्त्री-व्रतका वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! जो स्त्री कार्तिक मास के दोनों पक्षों की षष्ठी एवं सप्तमी तिथियों में क्षमा, अहिंसा आदि नियमों का पालन कर, संयतेन्द्रिय होती हुई एकभुक्त रहती… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६६ से १६७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६६ से १६७ निक्षुभार्क-सप्तमी तथा निक्षुभार्क-चतुष्टय-व्रत-माहात्म्य-वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! जो स्त्री उत्तम पुत्र की आकाङ्क्षा रखती है, उसे ‘निक्षुभार्क’ नाम का व्रत करना चाहिये । यह व्रत स्त्री एवं पुरुष… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६५ उभयसप्तमी-व्रत का वर्णन सुमन्तु मुनिने कहा — राजन् ! अब मैं आपको धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इस चतुर्वर्ग की प्राप्ति करानेवाले भगवान् सूर्य के उत्तम व्रत को बतलाता हूँ । पौष मास के उभयपक्ष… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६४ सूर्यषष्ठी-व्रत की महिमा सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अब आप भगवान् सूर्य को अत्यन्त प्रिय सूर्यषष्ठी व्रत के विषयमें सुनें । सूर्यषष्ठी-व्रत करनेवाले को जितेन्द्रिय एवं क्रोधरहित होकर अयाचित-व्रत का पालन करते हुए… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६३ विभिन्न पुष्पों द्वारा सूर्य-पूजन का फल सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अमित तेजस्वी भगवान् सूर्य को स्नान कराते समय ‘जय’ आदि माङ्गलिक शब्दों का उच्चारण करना चाहिये तथा शङ्ख, भेरी आदि के द्वारा… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६१ से १६२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६१ से १६२ सूर्योपासनाका फल शतानीक ने पूछा — मुने ! आपने भगवान् सूर्य के विषय में जो कहा, वह सत्य ही है, संसार के मूल कारण तथा परम दैवत भगवान् सूर्य ही… Read More


भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६० ब्रह्मादि देवताओं द्वारा सूर्यके विराट्-रूप का दर्शन महाराज शतानीक ने कहा — मुने ! आपने भगवान् सूर्य के अद्भुत चरित्र का वर्णन किया है, जिनका पूजन ब्रह्मा आदि देवता प्रतिदिन विधिपूर्वक करते रहते हैं… Read More