श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बाईसवाँ अध्याय चीरहरण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब हेमन्त ऋतु आयी । उसके पहले ही महीने में अर्थात् मार्गशीर्ष में नन्दबाबा के व्रज की कुमारियाँ कात्यायनी देवी की पूजा और व्रत करने लगीं । वे… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्कीसवाँ अध्याय वेणुगीत श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! शरद् ऋतु के कारण वह वन बड़ा सुन्दर हो रहा था । जल निर्मल था और जलाशयों में खिले हुए कमलों की सुगन्ध से सनकर वायु मन्द-मन्द चल… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय वर्षा और शरद् ऋतु का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! ग्वालबालों ने घर पहुँचकर अपनी मा, बहिन आदि स्त्रियों से श्रीकृष्ण और बलराम ने जो कुछ अद्भुत कर्म किये थे — दावानल से… Read More


‍श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय गौओं और गोपों को दावानल से बचाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! उस समय जब ग्वालबाल खेल-कूद में लग गये, तब उनकी गौएँ बेरोक-टोक चरती हुई बहुत दूर निकल गयीं और हरी-हरी घास के… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय प्रलम्बासुर-उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब आनन्दित स्वजन सम्बन्धियों से घिरे हुए एवं उनके मुख से अपनी कीर्ति का गान सुनते हुए श्रीकृष्ण ने गोकुलमण्डित गोष्ठ में प्रवेश किया ॥ १ ॥ इस… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय कालिय के कालियदह में आने की कथा तथा भगवान् का व्रजवासियों को दावानल से बचाना राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! कालिय नाग ने नागों के निवासस्थान रमणक द्वीप को क्यों छोड़ा था ?… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय कालिय पर कृपा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने देखा कि महाविषधर कालिय नाग ने यमुनाजी का जल विषैला कर दिया है । तब यमुनाजी को शुद्ध करने के विचार से उन्होंने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय धेनुकासुर का उद्धार और ग्वालबालों को कालियनाग के विष से बचाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब बलराम और श्रीकृष्ण ने पौगण्ड-अवस्था में अर्थात् छठे वर्ष में प्रवेश किया था । अब उन्हें गौएँ… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय ब्रह्माजीके द्वारा भगवान् की स्तुति ब्रह्माजी ने स्तुति की — प्रभो ! एकमात्र आप ही स्तुति करने योग्य हैं । मैं आपके चरणों में नमस्कार करता हूँ । आपका यह शरीर वर्षाकालीन मेघ के समान… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय ब्रह्माजी का मोह और उसका नाश श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! तुम बड़े भाग्यवान् हो । भगवान् के प्रेमी भक्तों में तुम्हारा स्थान श्रेष्ठ है । तभी तो तुमने इतना सुन्दर प्रश्न किया है… Read More