श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ११ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय बद्ध, मुक्त और भक्तजनों के लक्षण भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — प्यारे उद्धव ! आत्मा बद्ध है या मुक्त है, इस प्रकार की व्याख्या या व्यवहार मेरे अधीन रहनेवाले सत्त्वादि गुणों की उपाधि से ही होता… Read More
वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षयतृत्तीया) वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षयतृत्तीया) वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षयतृतीया कहते हैं । यह सनातनधर्मियों का प्रधान त्यौहार है । इस दिन दिये हुए दान और किये हुए स्त्रान, होम, जप आदि सभी कर्मों का फल अनन्त 1 होता है – सभी अक्षय हो जाते हैं; इसीसे इसका नाम अक्षया 2 हुआ है । इसी तिथि… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १० श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय लौकिक तथा पारलौकिक भोगों की असारता का निरूपण भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्यारे उद्धव ! साधक को चाहिये कि सब तरह से मेरी शरण में रहकर (गीता, पाञ्चरात्र आदि में) मेरे द्वारा उपदिष्ट अपने धर्मों… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय अवधूतोपाख्यान-कुरर से लेकर शृंगी तक सात गुरुओं की कथा अवधूत दत्तात्रेयजी ने कहा — राजन् ! मनुष्यों को जो वस्तुएँ अत्यन्त प्रिय लगती हैं, उन्हें इकट्ठा करना ही उनके दुःख का कारण है । जो बुद्धिमान्… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय अवधूतोपाख्यान — अजगर से लेकर पिङ्गला तक नौ गुरुओं की कथा अवधूत दत्तात्रेयजी कहते हैं — राजन् ! प्राणियों को जैसे बिना इच्छा के, बिना किसी प्रयत्न के रोकने की चेष्टा करने पर भी पूर्वकर्मानुसार दुःख… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय अवधूतोपाख्यान — पृथ्वी से लेकर कबूतर तक आठ गुरुओं की कथा भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महाभाग्यवान् उद्धव ! तुमने मुझसे जो कुछ कहा है मैं वही करना चाहता हूँ । ब्रह्मा, शङ्कर और इन्द्रादि लोकपाल… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय देवताओं की भगवान् से स्वधाम सिधारने के लिये प्रार्थना तथा यादवों को प्रभासक्षेत्र जाने की तैयारी करते देखकर उद्धव का भगवान् के पास आना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब देवर्षि नारद वसुदेवजी को उपदेश… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय भक्तिहीन पुरुषों की गति और भगवान् की पूजाविधि का वर्णन राजा निमि ने पूछा — योगीश्वरो ! आपलोग तो श्रेष्ठ आत्मज्ञानी और भगवान् के परमभक्त हैं । कृपा करके यह बतलाइये कि जिनकी कामनाएँ शान्त नहीं… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय भगवान् के अवतारों का वर्णन राजा निमि ने पूछा — योगीश्वरो ! भगवान् स्वतन्त्रता से अपने भक्तों की भक्ति के वश होकर अनेकों प्रकार के अवतार ग्रहण करते हैं और अनेकों लीलाएँ करते हैं । आपलोग… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय माया, माया से पार होने के उपाय तथा ब्रह्म और कर्मयोग का निरूपण राजा निमि ने पूछा — भगवन् ! सर्वशक्तिमान् परमकारण विष्णुभगवान् की माया बड़े-बड़े मायावियों को भी मोहित कर देती हैं, उसे कोई पहचान… Read More