श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-19 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उन्नीसवाँ अध्याय हिमालय को तत्त्व ज्ञान का उपदेश प्रदान कर देवी का सामान्य बालिका की भाँति क्रीडा करना है, गिरिराज द्वारा जन्म—महोत्सव, षष्ठी—महोत्सव तथा नामकरण आदि उत्सवों को संपादित करना है, भगवती गीता (पार्वती गीता) — के पाठ की महिमा अथ एकोनविंशतितमोऽध्यायः श्रीभगवतीगीता माहात्म्यवर्णनं श्रीमहादेवजी… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-18 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ अठारहवाँ अध्याय भगवती गीता के वर्णन में मोक्ष योग का उपदेश, देवी के स्थूल स्वरुपों में दस महाविद्याओं का वर्णन है, इन स्वरुपों की आराधना से मोक्ष की प्राप्ति, अनन्य शरणागति की महिमा अथ अष्टादशोऽध्यायः श्रीपार्वतीहिमालयसंवादे मोक्षयोगोपदेशवर्णनं हिमालय बोले — देवि ! यदि आपका आश्रय… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-17 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सत्रहवाँ अध्याय भगवती गीता के वर्णन में ब्रह्मयोग का उपदेश, पाञ्चभौतिक देह, गर्भस्थ जीव का स्वरुप तथा गर्भ में की गयी जीव की प्रतिज्ञा, माया से आबद्ध जीव का गर्भ से बाहर आने पर अपने वास्तविक स्वरुप को भूल जाना, विषय भोगों की दुःखमूलता तथा… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-16 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ सोलहवाँ अध्याय भगवती गीता के वर्णन में ब्रह्मविद्या का उपदेश, आत्मा का स्वरूप, अनात्मपदार्थों में आत्मबुद्धि का परित्याग, शरीर की नश्वरता का प्रतिपादन तथा अनासक्त योग का वर्णन अथ षोडशोऽध्यायः श्रीपार्वतीहिमालयसंवादे ब्रह्मविद्योपदेशवर्णनं हिमालय बोले — माता ! वह कैसी विद्या है, जिससे मुक्ति प्राप्त होती… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-15 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ पंद्रहवाँ अध्याय हिमालय और मेना की तपस्या से प्रसन्न हो आद्यशक्ति का ‘पार्वती’ नाम से हिमालय के यहाँ प्रकट होना और उन्हें दिव्य विज्ञानयोग का उपदेश प्रदान करना (भगवती गीता का प्रारम्भ) अथ पञ्चदशोऽध्यायः श्रीपार्वतीहिमालयसंवादे विज्ञानयोगोपदेशवर्णनं नारदजी बोले — महादेव ! परमेश्वरी सती जिस प्रकार… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-14 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ चौदहवाँ अध्याय ब्रह्माजी का गङ्गा जी को कमण्डलु में लेकर स्वर्ग में आना है, माता से मिले बिना गङ्गा के स्वर्गलोक चले जाने पर क्रुद्ध मेना द्वारा उन्हें जलरूप होकर पुनः पृथ्वीलोक आने का शाप देना है, स्वर्गलोक में देवी गङ्गा से भगवान् शंकर का… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-13 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ तेरहवाँ अध्याय मेनका के गर्भ के अर्धांश से गङ्गा के प्राकट्य का आख्यान, देवर्षि नारद द्वारा हिमालय को गङ्गा का माहात्म्य सुनाना, ब्रह्मादि देवताओं द्वारा हिमालय से भगवती गङ्गा को ब्रह्मलोक ले जाने की याचना करना अथ त्रयोदशोऽध्यायः श्रीमहादेवनारदसंवादे गङ्गागमनं श्रीमहादेवजी बोले — वत्स !… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-12 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ बारहवाँ अध्याय शंकर जी का योनिपीठ कामरूप (कामाख्या) में जाकर तपस्या करना है, जगदम्बा द्वारा प्रकट होकर शीघ्र ही गङ्गा तथा हिमालय पुत्री पार्वती के रूप में आविर्भूत होने का उन्हें वर प्रदान करना है, भगवान् शंकर द्वारा इक्यावन शक्तिपीठों में प्रधान कामरूप पीठ के… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-11 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ ग्यारहवाँ अध्याय त्रिदेवों द्वारा जगदम्बिका की स्तुति करना, देवी का भगवान् शंकर को पार्वती रूप में पुनः प्राप्त होने का आश्वासन देना, छाया सती की देह लेकर शिव का प्रलयंकारी नृत्य करना, भगवान् विष्णु का सुदर्शन चक्र से सती के अङ्गों को काटना और उनसे… Read More


श्रीमहाभागवत [देवीपुराण]-अध्याय-10 ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ दसवाँ अध्याय सती के यज्ञकुण्ड में प्रवेश का समाचार सुनकर भगवान् शंकर का शोक से विह्वल होना, उनके तृतीय नेत्र की अग्नि से वीरभद्र का प्राकट्य, वीरभद्र द्वारा दक्ष का यज्ञ-विध्वंस कर उनका सिर काटना, ब्रह्माजी का भगवान् शंकर से यज्ञ पूर्ण करने की प्रार्थना… Read More